सवाल- क्या भारत अपने मित्र देश खो रहा है? विदेश मंत्री का जवाब- अब हम सच्चे दोस्तों को पहचान रहे हैं
नई दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को दिल्ली में ग्लोबल बिजनेस समिट में हिस्सा लिया। इस दौरान सीएए और भारतीय विदेश नीति से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब दिए। उनसे पूछा गया-क्या भारत अपने मित्र देश खो रहा है? इस पर जयशंकर ने कहा, “शायद, अब भारत अपने सच्चे दोस्त पहचान रहा है। एक वक्त जोखिम बहुत थे, हमारी क्षमताएं कम थीं। तब हमने दुनिया को मैनेज करने की रणनीति अपनाई। लेकिन, आगे ये नहीं किया जा सकता। भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।एक दिन तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। दुनिया बदल रही है। अब हमें दुनिया को दूसरी तरह से संभालना होगा।
External Affairs Minister Subrahmanyam Jaishankar at Global Business Summit in Delhi, on being asked 'are we losing our friends(in the world)?: Maybe we are getting to know who our friends really are. (1/2) pic.twitter.com/NfcC9hFUJJ
— ANI (@ANI) March 7, 2020
मीडिया पर तंज
जयशंकर से पूछा गया- अगर भारत दुनिया को सीएए पर अपना पक्ष नहीं समझा पाया तो क्या होगा?इस पर उन्होंने कहा, ‘‘मीडिया से हटकर भी दुनिया है। मैं दुनिया के देशों की सरकारों के साथ जुड़ा हुआ हूं। ब्रसेल्स में मैने 27 विदेश मंत्रियों से सीएए पर बातचीत की थी।’’सीएए परसंयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की निदेशक ने असहमति जताई थी। जब इस बारे में जयशंकर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “वे पहले भी कई मुद्दों पर गलत रही हैं। मैनें जम्मू-कश्मीर पर भी उनकी रिपोर्ट देखी है। कितनी आसानी से वे सीमा पार आतंकवाद की बात से किनारा कर लेते हैं। ऐसा लगता हैजैसे पड़ोसी देशमें क्या हो रहा है, उससे उनका कुछ लेना देना ही नहीं है। ’’
EAM S Jaishankar on UN Human Rights Council Director doesn't seem to agree with you(on #CAA): Sure,she has been wrong before.I have seen reports on J&K by the same body,how carefully they skirt around the cross border terror problem as if its nothing to do with country next door. pic.twitter.com/P56RjZEnO2
— ANI (@ANI) March 7, 2020
सीएए पर सख्त
जयशंकर ने साफ कर दिया कि सीएए भारत का आंतरिक मामला है। इससे किसी देश का कोई ताल्लुक नहीं होना चाहिए। भारतीय विदेश मंत्री के मुताबिक, “सरकार और संसद के पास अधिकार हैं कि वे देश मेंनागरिकता की शर्तें निर्धारित कर सकें। हमने इस देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को शरण दी है, जिनके पास कोई नागरिकता नहीं थी।”
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