नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में सुनवाई आज; स्टाइरीन के असर को कम करने के लिए कोशिशें तेज, 3 किमी के दायरे में गांव खाली कराए

आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम से करीब 30 किमी दूर वेंकटपुरम गांव में एलजी पॉलिमर्स इंडस्ट्री के केमिकल प्लांट में गैस रिसाव के बाद हालात पर काबू करने की कोशिशें जारी हैं। गांव के आसपास 3 किमी के दायरे को खाली करा लिया गया है। उधर, गैस के असर को कम करने के लिए गुजरात से केमिकल पैरा टर्शरी ब्यूटाइल केटकॉल (पीटीबीसी) मंगाया गया है। देर रात एयर इंडिया का एक कार्गो प्लेन इसे लेकर विशाखापट्टनम पहुंचा।

उधर, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में आज इस मामले की सुनवाई होगी। आंध्रप्रदेश के एक एनजीओ ने एनजीटी में याचिका दाखिल कर इस मामले की जांच हाई लेवल कमेटी से करवाने की मांग की है। इसमें कहा गया कि इस कमेटी को रिटायर्ड जस्टिस लीड करें।

पुलिस ने कहा- फिर गैस लीक नहीं हुई

केमिकल प्लांट में 21 घंटे बाद गुरुवार रात 11.30 बजे दोबारा गैस का रिसाव की खबर आई। हालांकि, पुलिस का दावा है कि गैस लीक नहीं हुई। विशाखापट्टनम के पुलिस कमिश्नर आर के मीणा का कहना है कि एहतियात के तौर पर 2 किलोमीटर के दायरे में गांवों को खाली कराया गया है। अफवाहों पर ध्यान न दें। घटनास्थल से 2 किलोमीटर दूर वाले लोगों को घरों से बाहर आने की जरूरत नहीं है।इससे पहले बुधवार रात 2.30 बजे गैस लीक हुई थी।

कई लोग बेहोश होकर गिर गए थे
गैस 4 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 5 छोटे गांवों में फैल गई थी। इससे 2 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हुई। बुधवार सुबह हालात बेहद खराब थे। लोगों के घरों तक गैस घुस गई। लोगों को बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टियां होने के बाद उनकी नींद खुली। कई लोग बेहोश हो गए। गुरुवार सुबह तक वेंकटपुरम गांव से इसी तरह की तस्वीरें सामने आती रहीं। कई लोग खड़े-खड़े बेहोश होकर गिरते नजर आए।

वेंकटपुरम स्थित एलजी पॉलिमर्स इंडस्ट्री के केमिकल प्लांट का सैटेलाइट व्यू।

स्टाइरीन गैस लीक हुई; यह फाइबर, रबर, पाइप बनाने में इस्तेमाल होती है
जो गैस लीक हुई, वह पीवीसी यानी स्टाइरीन कहलाती है। यह न्यूरो टॉक्सिन है। इसका केमिकल फॉर्मूला C6H5CH=CH2 होता है। यह सबसे लोकप्रिय ऑर्गनिक सॉल्वेंट बेंजीन से पैदा हुआ पानी की तरह बिना रंग वाला लिक्विड होता है। इसी से गैस निकलती है। यह दम घोंट देने वाली गैस है। यह सांसों के जरिए शरीर में चली जाए तो 10 मिनट में ही असर दिखाना शुरू कर देती है। यह गैस पॉलिस्टाइरीन प्लास्टिक, फाइबर ग्लास, रबर और पाइप बनाने के प्लांट में इस्तेमाल होती है।



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जहरीली गैस से बेहोश हुए करीब 300 लोगों को विशाखापट्‌टन के सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती किया गया है।


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